blogid : 361 postid : 101

आखिरी खत

Posted On: 18 Mar, 2013 Others,मेट्रो लाइफ में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

यह खत है
एसएमएस के युग में
इसीलिए संभवत: अंतिम हो/

खत
उस पागल हवा के नाम
जो तुम्‍हारे नगमे सुनाती थी
और कहती थी
ख़तों जितनी हो
इस दुनिया की उम्र/
उस खुशबू के नाम
जो अब तक कहती है मैं हूं/
लगता है गलत था कि खत कभी
मरते नहीं
भटकते नहीं
उलझते नहीं
अटकते नहीं/

मैं हैरत लिए पूछ रहा हूं
कोई मुझे
एसएमएस की उम्र बताए
जो छोटा होकर भी खतों को निगल गया/
खतरे हैं कई
कुछ बौनों ने आदमकदों को नेपथ्‍य में धकेल दिया
कुछ बहरों ने सुरों को किया है तसदीक/

कहना हवाओं से
मैं फिर आऊंगा
इस बार नहीं कहा जा सका सबसे सब कुछ/
नदिया से कहना बहती रहे/
समंदर से कहना
पहाड़ याद करता है/
बादलों को देना
धूप में तपती भाषा का पता/

बावड़ी से कहना
अगली बार ऐसे नहीं आऊंगा
साथ होंगे मजबूत हाथ
तब झाडि़यां नहीं बावड़ी होगी/

कोयल से कहना
कोई सुने न सुने
गाती रहे
ठीक वैसे
जैसे बांसुरी चुप नहीं बैठती/

भीड़ से घबराई बच्‍ची को कहना
रास्‍ता भीड़ से ही निकलता है/

कहना मां से
बेटे इतने भी बुरे नहीं होते
तपती धरती पर ठिठुर रहे हैं संबंध/

भाइयों से कहना
बाजू मजबूरी नहीं, जरूरी होते हैं/

इस सदी में
बड़ा चाहिए बाजार
लेकिन
परिवार
त्‍योहार
विचार
आहार
व्‍यवहार
सब छोटे हों एसएमएस की तरह/
खतों की तफसील
नहीं है
युग की रफ्तार की मांग/

मरते हुए खतों की आखिरी बात याद रखना
भाषाविदों से कहना
व्‍याकरण को गंगाजी को न सौंप देना
उसकी जरूरत हो्गी फिर एक दिन/
समाजशास्त्रियों से कहना
अभी बैठे रहें
रात बीतते ही
अकेलेपन से ठिठुरे लोग आएंगे
उनके लिए रख लेना
संबंधों का थोड़ा सा ताप
मुक्‍त करने में समय लेता है कोई भी शाप

-नवनीत शर्मा

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (9 votes, average: 4.89 out of 5)
Loading ... Loading ...

28 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vartika के द्वारा
April 3, 2016

बहुत खूब, नवीन जी!

Bhola nath Pal के द्वारा
January 17, 2016

अकेलेपन से ठिठुरे लोग, आएंगेउनके लिए रख लेना, संबंधों का थोड़ा सा ताप .भाव व् शव्द चयन अच्छा …

maharathi के द्वारा
May 2, 2015

कुछ बौनों ने आदमकदों को नेपथ्य में धकेल दिया। पंक्ति दिल कू छू गई। बधाई…….. डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी’ वृन्दावन, मथुरा (उ.प्र.) http://maharathi.jagranjunction.com/

vikash kumar के द्वारा
October 9, 2014

बहुत खूब

ikshit के द्वारा
March 28, 2014

मित्र… भावुक सोच पर गहरा उतरने कि बधाई स्वीकार करें – इच्छित

Ashutosh Shukla के द्वारा
March 16, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति नवनीत जी… कभी इधर भी समय अवश्य दें..

Charchit Chittransh के द्वारा
January 17, 2014

शानदार!!!

ikshit के द्वारा
January 16, 2014

इंसानों का सम्बन्ध् इंसान से जुड़ना सबसे खुशनुमा सच है… आप कि भावनाओं का हार्दिक स्वागत है… – इच्छित

ikshit के द्वारा
January 5, 2014

Badi Gahri Soch hai… Sir ji… Pranaaam !!!

nirmalasinghgaur के द्वारा
November 17, 2013

 ख़त को बहुत आत्मीय श्रद्धांजली,बहुत बेहतरीन रचना, बधाई , निर्मला सिंह गौर

udayraj के द्वारा
October 6, 2013

इस सदी में बड़ा चाहिए बाजार लेकिन परिवार त्‍योहार विचार आहार व्‍यवहार सब छोटे हों एसएमएस की तरह/ खतों की तफसील नहीं है युग की रफ्तार की मांग/ मरते हुए खतों की आखिरी बात याद रखना *******************************  एस एम एस की तरह गागर में सागर भर दिये है आपने । आभार …

bdsingh के द्वारा
October 5, 2013

बहुत सुन्दर  कविता ।

krishnakant के द्वारा
July 28, 2013

अकेलेपन से ठिठुरे लोग आएंगे उनके लिए रख लेना संबंधों का थोड़ा सा ताप बेहद सुंदर कविता है.. बधाई.

yatindrapandey के द्वारा
March 27, 2013

हैलो सर बेहद सुन्दर दिल को छू गयी आपकी बाते

    Navneet Shrama Jagran के द्वारा
    January 8, 2016

    यतिंद्र जी, अाभार। सादर नवनीत

achyutamkeshvam के द्वारा
March 18, 2013

अति सुंदर कविता के लिए आपको हार्दिक बधाई

    navneet sharma के द्वारा
    March 19, 2013

    आदरणीय अच्‍युतम जी, आपने टिप्‍पणी की और समय दिया, यह मेरे लिए सनद से कम नहीं। धन्‍यवाद।

Dwijendra Dwij के द्वारा
March 18, 2013

ख़तों का एस.एम..एस. में ख़ात्मा चीख़ती है ख़तों की आत्मा. बचाना प्रभो!!! अप्रतिम कविता. बधाई

    navneet sharma के द्वारा
    March 18, 2013

    भाई साहब, सादर नमस्‍कार। बहुत-बहुत आभार।

Mahesh के द्वारा
March 18, 2013

सामाजिक परिदृश्‍य को आयना दिखाती हुई ये कविता बहुत कुछ सोचने के लिये मजबूर करती है… साधुवाद…

    navneet sharma के द्वारा
    March 18, 2013

    महेशजी, आभारी हूं। शुक्रिया।

Rahul Mittal के द्वारा
March 18, 2013

भाई साहब ……. छा गये…….. बहुत खूब……….

महेश मिश्रा के द्वारा
March 18, 2013

सर, इस अति सुंदर कविता के लिए आपको हार्दिक बधाई ।

Rahul Mittal के द्वारा
March 18, 2013

नवनीत भाई साहब, बहुत ही अच्छी कविता लिखी है आपने……….. बहुत खूब…..

    navneet sharma के द्वारा
    March 18, 2013

    राहुल भाई साहब। जंक्‍शन पर आपका स्‍वागत। टिप्‍पणी के लिए दिल से आभार।

देवेश् के द्वारा
March 18, 2013

भाषाविदों से कहना व्‍याकरण को गंगाजी को न सौंप देना….. आपने तो दर्द ही बयान कर दिया आज के युग की….

    navneet sharma के द्वारा
    March 18, 2013

    शुक्रिया देवेश जी। टिप्‍पणी के लिए आभार।


topic of the week



latest from jagran